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उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम

प्रमुख जानकारियाँ

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ऋण प्राप्त करने हेतु कुछ जानकारियाँ

उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम लि0 द्वारा संचालित योजनाओं से लाभ प्राप्त हेतु निम्नलिखित व्यक्ति पात्र होगें

  1. जो उत्तर प्रदेश का मूल निवासी हो,
  2. जिन्होंने 18 वर्ष की आयु पूरी कर ली हो,परन्तु प्रतिबन्ध यह है कि ऐसे आवेदकों के प्रार्थना पर वरीयता के आधार पर पहले विचार किया जायेगा जिसने राजकीय सेवा हेतु अधिकतम आयु पूर्ण कर ली हो अर्थात राजकीय सेवा हेतु अधिकतम आयु के आधार पर अर्ह न हो, परन्तु अधिकतम 40 वर्ष से अधिक न हो।
  3. जो बेरोजगार हो और जीवन यापन का कोई साधन उसके पास न हो।
  4. उत्तर प्रदेश शासन द्वारा अधिसूचित पिछड़ी जाति का सदस्य हो।
  5. कम से कम स्नातक स्तर की शैक्षिक आर्हता(सामान्य/तकनीकी) वाले अभ्यर्थियो को वरीयता दी जायेगी।
  6. संबंधित व्यवसाय/उद्योग में तकनीकी जानकारी/अनुभव प्राप्त व्यक्ति को वरीयता दी जायेगी।
  7. जिसकी/परिवार की वर्तमान में समस्त स्रोतों से वार्षिक आय शहरी/ग्रामीण क्षेत्र में रुपये ३.०० लाख तक हो परन्तु कम से कम ५०% ऐसे व्यक्तियों को लाभान्वित किया जायेगा जिनकी/उनके परिवार की वार्षिक आय रुपये १.५० लाख तक है।

आवेदन पत्र:

ऋण प्राप्त करने हेतु निर्धारित प्रारूप पर आवेदन करना होगा। आवेदन पत्र प्रत्येक जनपद के जिला प्रबंधक कार्यालय अथवा निगम मुख्यालय से निःशुल्क प्राप्त किया जा सकता है। ऋण हेतु आवेदन पत्र सम्बंधित जनपद के जिला प्रबंधक कार्यालय में जमा किया जा सकता है।

जाति एवं आय प्रमाण पत्र:

जाति एवं आय प्रमाण पत्र राजस्व विभाग के ऐसे अधिकारी जो तहसीलदार स्तर से कम न हो, द्वारा जारी किया गया ही मान्य होगा। यही अधिकारी सक्षम घोषित है।

जिला चयन समितिः

निगम की योजना के अन्तर्गत लाभार्थी पहचान एवं चयन के कार्य हेतु जिलाधिकरी अथवा उनके द्वारा नामित मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता मे गठित चयन समिति मे किया जाता है। चयन समिति निम्न प्रकार है…

1- जिला अधिकारी अथवा उनके द्वारा नामित अधिकारी अध्यक्ष
2- मण्डलीय उप निदेशक, पिछड़ा वर्ग कल्याण उपाध्यक्ष
3- निगम मुख्यालय द्वारा नामित एक गैर सरकारी सदस्य सदस्य
4- लीड बैंक अधिकारी सदस्य
5- जिला समाज कल्याण अधिकारी सदस्य
6- अपर जिला विकास अधिकारी सदस्य
7- जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी सदस्य सचिव

ऋण की अदायगी:

ऋण की अदायगी 60 बराबर किश्तो मे की जानी है। नियमित ऋण की अदायगी करने पर ब्याज मे 0.5 प्रतिशत की छूट प्रदान की जायेगी तथा नियमित भुगतान न करने पर 6 प्रतिशत वार्षिक की दर से दण्ड ब्याज का भुगतान करना होगा।

ऋण का उपयोग:

लाभार्थी द्वारा ऋण का उपयोग यदि उस कार्य हेतु नही किया जाता है जिसके लिये ऋण लिया गया है तो ऋण की धनराशि पर 12 प्रतिशत की दर से ब्याज चार्ज किया जायेगा तथा बकाया धनराशि एक मुश्त बसूल की जायेगी।

बकाया ऋण की बसूली:

ऋण ग्रहीता द्वारा ऋण का भुगतान न करने की दशा मे बकाया ऋण की बसूली उ0प्र0 लोकधन(देयों) की बसूली अधिनियम 1972 के अर्न्तगत सक्षम अधिकारी द्वारा बसूली प्रमाण पत्र(रिकवरी सर्टिफिकेट) जारी कर दिये जाने का प्राविधान है।

अनुदान:

निगम द्वारा संचालित टर्म लोन, न्यू स्वर्णिमा, महिला संवृद्धि योजना, सूक्ष्म क्रेडिट, विशलेषण व शैक्षिक ऋण योजना के अर्न्तगत परियोजना ऋण पर कोई अनुदान नही है।