संचालित ऋण योजनायें

उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम लि० की स्थापना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में गरीबी / दोहरी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले अधिसूचित अन्य पिछड़े वर्गों के बेरोजगार युवक / युवतियों को शिक्षा तथा विभिन्न व्यवसाय / उद्यम / उद्योग स्थापित करने हेतु आसान ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

उत्तर प्रदेश पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम लि०, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम, नई दिल्ली की कार्यकारी शाखा (चैनलाइजिंग एजेंसी) के रूप में कार्यरत है। निगम द्वारा राष्ट्रीय निगम से आसान ब्याज दर पर ऋण प्राप्त कर निम्नलिखित योजनायें संचालित की जा रही है-

1. सावधि ऋण योजना (टर्म लोन स्कीम)
क. सामान्य ऋण योजना (जनरल लोन स्कीम)I ख. नई स्वर्णिमा योजना (न्यू स्वर्णिमा स्कीम)I ग. शिक्षा ऋण योजना (एजुकेशन लोन स्कीम)I

(क) सामान्य ऋण योजना (जनरल लोन स्कीम)

इस योजना के अन्तर्गत कृषि, दस्तकारी, पारंपरिक व्यवसाय, तकनीकी व्यवसाय, लघु एवं कुटीर उद्योग तथा अन्य सामान्य व्यवसायों हेतु ऋण दिया जाता है। सामान्य ऋण योजना (जनरल लोन स्कीम) के अन्तर्गत परिवहन व सेवा क्षेत्र जैसे विभिन्न क्षेत्रों में आय सृजित करने वाले कार्यकलापों के लिए ऋण सहायता उपलब्ध करायी जाती । इस योजना की महत्वपूर्ण विशेषताएँ निम्नवत् हैं:-

ऋण की सीमा रु० 15.00 लाख तक प्रति लाभार्थी।
ऋण अदायगी की सीमा अधिकतम 5 वर्ष (60 माह)।
वित्तीय पद्धति 1-राष्ट्रीय निगम अंश:                  85 प्रतिशत।
2-निगम अंश:                           10 प्रतिशत ।
3-लाभार्थी अंश:                         5 प्रतिशत।
ब्याज दर (वार्षिक) रु0 5.00 लाख तक के ऋण पर       6 प्रतिशत
रु0 5.00 लाख से अधिक तथा रु0 10.00 लाख तक के ऋण पर   7 प्रतिशत

रु0 10.00 लाख से अधिक तथा रु0 15.00 लाख तक के ऋण पर  8 प्रतिशत

(ख) नई स्वर्णिम योजना(न्यू स्वर्णिमा स्कीम)

अन्य पिछड़े वर्ग की गरीबी रेखा/दोहरी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रही महिलाओं में आत्मनिर्भरता की भावना जागृत करने हेतु निगम द्वारा उनके लिए नई स्वर्णिमा योजना (न्यू स्वर्णिमा स्किम) संचालित की गई हैं। इस योजना की महत्त्वपूर्ण विशेषताएं निम्नवत्त हैं:-

1-ऋण की सीमा रु० 2.00 लाख अधिकतम।
2- ऋण अदायगी की सीमा अधिकतम 8 वर्ष (96 माह)
3-वित्तीय पद्धति 1-राष्ट्रीय निगम अंश:        95 प्रतिशत।
2-निगम अंश:                 05 प्रतिशत ।
3-लाभार्थी अंश:              00 प्रतिशत।
4-ब्याज दर (वार्षिक) 05 प्रतिशत।

(ग) शिक्षा ऋण योजना (एजूकेशन लोन स्कीम)

निगम द्वारा राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम के आर्थिक सहयोग से प्रदेश के अन्य पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों, जो गरीबी रेखा अथवा दोहरी गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे हैं, को व्यवसायिक, तकनीकी शिक्षण हेतु शैक्षिक ऋण प्रदान किये जाने की योजना संचालित है। योजना की महत्वपूर्ण विशेषताएँ निम्नवत् हैं:-

पात्रता छात्र/छात्रा द्वारा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (ए०आई०सी०टी०ई०), भारतीय चिकित्सा परिषद, यू०जी०सी० आदि जैसी भी स्थिति हो, के द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में प्रवेश प्राप्त किया होना चाहिए तथा योग्यता परीक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंश होने चालिए।

ऋण की सीमा 1-भारत में अध्ययनरत छात्र/छात्राओं को अधिकतम रु0-15.00 लाख अथवा जो कम हो।

     2-विदेश में अध्ययनरत छात्र/छात्रों को अधिकतम रू0 20.00 लाख अथवा जो कम हो।

     3-ऋण अदायगी की सीमाः अधिकतम 15 वर्ष (बैंकिंग पद्धति के अनुसार)।

वित्तीय पद्धति

भारत में अध्यनरत

विदेश में अध्यनरत

राष्ट्रीय निगम अंश

90 प्रतिशत

85 प्रतिशत

निगम अंश

05 प्रतिशत

10 प्रतिशत

लाभार्थी अंश

05 प्रतिशत

05 प्रतिशत

ब्याज दर (वार्षिक)

4 प्रतिशत वार्षिक (महिला अभ्यर्थियों को 3.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर)

नोटः-जिला प्रबन्धकों को यहां यह भी स्पष्ट किया जाता है कि वे शिक्षा ऋण स्वीकृत / प्रदान करने से पूर्व शिक्षण संस्थान, संस्थान की गुणवत्ता और पाठ्यक्रम से संबद्धता के सम्बन्ध में और संस्थान में प्लेसमेन्ट के पिछले रिकार्ड की उचित जांच करें। उक्त के अतिरिक्त पाठ्यक्रम के लिए योग्यता परीक्षा में 50 प्रतिशत न्यूनतम अंक निर्धारित किए गये हैं, परन्तु सीमित धनराशि की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए यह वांछनीय है कि ऋण वितरण में ऐसे मेधावी एवं योग्य छात्रों/छात्राओं को प्राथमिकता दी जाये, जो रोजगार पाने व ऋण चुकाने की सम्भावना रखतें हैं।

                  क. सूक्ष्म वित्त योजना (माइक्रो फाइनेंस स्कीम)
                  ख. महिला समृद्धि योजना (महिला समृद्धि स्कीम)
                   ग. लघु ऋण योजना (स्माल लोन स्कीम)
                   घ. एनबीएफआई-एमएफआई ऋण योजना (एनबीएफआई-एमएफआई लोन स्कीम)

 

(क) सूक्ष्म वित्त योजना (माइक्रो फाइनेंस स्कीम)

इस योजना के अन्तर्गत अन्य पिछड़े वर्ग के व्यक्तियों के स्व-सहायता समूह (एस०एच०सी०) विशेष रूप से लक्षित समूह के मिश्रित समूहों को ऋण स्वीकृत किए जाने का प्राविधान है। इस योजना की महत्वपूर्ण विशेषताएँ निम्नवत् हैं:-

1-ऋण की सीमारु० 1.25 लाख अधिकतम प्रति लाभार्थी तथा अधिकतम रु0 15.00 लाख प्रति समूह।
2- ऋण अदायगी की सीमाअधिकतम 4 वर्ष (48 माह)
3-वित्तीय पद्धति1-राष्ट्रीय निगम अंश:        90 प्रतिशत।
2-निगम अंश:                 05 प्रतिशत ।
3-लाभार्थी अंश:              05 प्रतिशत।
4-ब्याज दर (वार्षिक)5 प्रतिशत।

 

(ख) महिला समृद्धि योजना (महिला समृद्धि स्कीम)

इस योजना के अन्तर्गत अन्य पिछड़े वर्ग के व्यक्तियों को लघु उद्योग स्थापित करने हेतु ऋण स्वीकृत किए जाने का प्राविधान है। इस योजना की महत्वपूर्ण विशेषताएँ निम्नवत् हैं:-

1-ऋण की सीमारु० 1.25 लाख अधिकतम प्रति लाभार्थी तथा अधिकतम रु0 15.00 लाख प्रति समूह।
2- ऋण अदायगी की सीमाअधिकतम 4 वर्ष (48 माह)
3-वित्तीय पद्धति1-राष्ट्रीय निगम अंश:        90 प्रतिशत।
2-निगम अंश:                 05 प्रतिशत ।
3-लाभार्थी अंश:              05 प्रतिशत।
4-ब्याज दर (वार्षिक)4 प्रतिशत।

 

 

(ग) लघु ऋण योजना (स्माल लोन स्कीम)

इस योजना के अन्तर्गत अन्य पिछड़े वर्ग के व्यक्तियों को लघु व्यवसाय स्थापित करने हेतु ऋण स्वीकृत किए जाने का प्राविधान है। इस योजना की महत्वपूर्ण विशेषताऐं निम्नवत् हैं-

1-ऋण की सीमारु० 1.25 लाख अधिकतम प्रति।
2- ऋण अदायगी की सीमाअधिकतम 8 वर्ष (96 माह)
3-वित्तीय पद्धति1-राष्ट्रीय निगम अंश:        85 प्रतिशत।
2-निगम अंश:                 10 प्रतिशत ।
3-लाभार्थी अंश:              05 प्रतिशत।
4-ब्याज दर (वार्षिक)6 प्रतिशत।

 

 

(घ) एनबीएफआई-एमएफआई ऋण योजना (एनबीएफआई-एमएफआई लोन स्किम)

इस योजना के अन्तर्गत अन्य पिछड़े वर्ग के व्यक्तियों एवं उनके द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूहों को ऋण स्वीकृत किए जाने का प्राविधान है। इस योजना की महत्वपूर्ण विशेषताऐं निम्नवत् हैं-

1-ऋण की सीमारु० 1.25 लाख अधिकतम प्रति लाभार्थी तथा अधिकतम रु0 15.00 लाख प्रति समूह।
2- ऋण अदायगी की सीमाअधिकतम 4 वर्ष (48 माह)
3-वित्तीय पद्धति1-राष्ट्रीय निगम अंश:        90 प्रतिशत।
2-निगम अंश:                 05 प्रतिशत ।
3-लाभार्थी अंश:              05 प्रतिशत।
4-ब्याज दर (वार्षिक)12 प्रतिशत।